कोहरा (Kohra)
लव जिहाद, वामपंथ और नक्सलवाद के जटिल गठजोड़, छद्म रिश्तों और वैचारिक षड्यंत्रों के गहरे कोहरे को चीरता एक साहसिक, संवेदनशील और यथार्थपरक उपन्यास।
Key Highlights of the Book
About "कोहरा" (Kohra)
A bold novel unravelling the fog of ideological conspiracies and human deception.
'कोहरा' युवा राष्ट्रवादी लेखक करुणा सागर पण्डा का प्रथम उपन्यास है, जो वर्तमान भारतीय समाज के सबसे संवेदनशील और ज्वलंत विषयों पर बिना किसी लाग-लपेट के प्रकाश डालता है।
उपन्यास में प्रेम और विश्वास के पीछे छिपे रणनीतिक छल, लव जिहाद के पैटर्न्स और वामपंथी-नक्सली तंत्र के गठजोड़ को गहराई से उजागर किया गया है। यह पुस्तक न केवल पाठकों को झकझोरती है बल्कि सामाजिक सतर्कता का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
Product Specifications
| Book Title | कोहरा (Kohra) |
| Author | करुणा सागर पण्डा (Karuna Sagar Panda) |
| Language | Hindi (हिन्दी) |
| Binding / Format | Paperback (पेपरबैक) |
| Publisher | SLS Publication (Sanatan Life Style) |
| ISBN | 978-81-998260-0-7 |
| Amazon ASIN | B0HCTFGFJR |
| Price | ₹245 + ₹30 Delivery |
Read Sample Excerpt
“सर्दियों की उस सुबह जब कोहरा चारों ओर फैला था, किसी को भनक भी नहीं थी कि शांत गलियों में कौन सा जाल बुना जा रहा है। नाम बदले हुए थे, पहचानें बदली हुई थीं, लेकिन इरादे सदियों पुराने थे।”
“कॉलेज के उस कैफे में बैठी अनन्या के लिए वह सिर्फ 'रोहित' था—एक मृदुभाषी दोस्त। लेकिन उस मुस्कान के पीछे छिपे यथार्थ का पता तब चला जब बहुत देर हो चुकी थी...”
करुणा सागर पण्डा (Karuna Sagar Panda)
करुणा सागर पण्डा युवा पीढ़ी के उन राष्ट्रवादी लेखकों में हैं जिन्होंने अपनी कलम को वैचारिक बंधनों से मुक्त रखकर यथार्थ की ज़मीन पर लिखा है। उनके लेखन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रिय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और समकालीन षड्यंत्रों से परिचित कराना है।
What Readers Are Saying
Verified reader reviews and feedback from across India.
"कोहरा एक ऐसी पुस्तक है जो शुरू करने के बाद आपको अंत तक बांधे रखती है। लेखक ने सामाजिक विमर्श को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है।"
"आज के समय में जब छद्म रिश्तों का चलन बढ़ रहा है, यह पुस्तक हर परिवार और युवा के लिए एक अनिवार्य पथ-प्रदर्शक का काम करती है।"
"₹245 में इतनी उच्च गुणवत्ता की पुस्तक और ₹30 डिलीवरी में 3 दिन के अंदर स्पीड पोस्ट से सुरक्षित प्राप्त हो गई। शानदार अनुभव!"
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अध्याय 1: धुंध और चेहरे
सर्दियों की उस सुबह जब कोहरा चारों ओर फैला था, किसी को भनक भी नहीं थी कि शहर की शांत गलियों में कौन सा जाल बुना जा रहा है। नाम बदले हुए थे, पहचानें बदली हुई थीं, लेकिन इरादे सदियों पुराने थे।
कॉलेज के उस कैफे में बैठी अनन्या के लिए वह सिर्फ 'रोहित' था—एक मृदुभाषी, संवेदनशील और हर मुश्किल में साथ देने वाला दोस्त। लेकिन उस मुस्कान के पीछे कौन सी विचारसरणी काम कर रही थी, इसका आभास उसे तब हुआ जब बहुत देर हो चुकी थी।
लेखक करुणा सागर पण्डा इस उपन्यास में पाठकों को उन गलियारों में ले जाते हैं जहाँ वैचारिक प्रतिबद्धताएँ व्यक्तिगत संबंधों को लील जाती हैं। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, यह उस अनकही पीड़ा का दस्तावेज़ है जिसे समाज अक्सर अनदेखा कर देता है।