प्रसन्नता को जीवन का आधार बनाने का सनातन रहस्य
मनुष्य का वास्तविक स्वरूप आनंदमय है। उपनिषद कहते हैं — “आनंदो ब्रह्मेति व्यजानात्” अर्थात ब्रह्म, परम सत्य, आनंदस्वरूप है। इसका […]
Inner growth, balance, and mindful living
मनुष्य का वास्तविक स्वरूप आनंदमय है। उपनिषद कहते हैं — “आनंदो ब्रह्मेति व्यजानात्” अर्थात ब्रह्म, परम सत्य, आनंदस्वरूप है। इसका […]
सनातन जीवन पद्धति का मूल सिद्धांत है कि व्यक्ति नहीं, व्यवस्था श्रेष्ठ है। यह एक ऐसी जीवन दृष्टि है जिसमें
चिंता एक ऐसी आग है जो बाहर कुछ नहीं जलाती, पर भीतर की शांति, बुद्धि और जीवनी शक्ति को धीरे-धीरे
उम्मीद जीवन को गति देती है — पर जब यही उम्मीद अपेक्षा बन जाती है, तो मन पर बोझ बनकर
मनुष्य का सबसे निकटतम मित्र या शत्रु कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि उसका अपना मन होता है। संसार की जितनी